मंदिर और मस्जिद के शोर में सच कहीं खो गया है।
मंदिर और मस्जिद के शोर में सच कहीं खो गया है। दोनों तरफ से आरोप लगाए जा रहे हैं दोनों तरफ से राजनीति हो रही है।
लेकिन सच्चाई की बात कोई नहीं कर रहा सच्चाई कैसे पता चलेगी । जब कोई इतिहास की बात ही नहीं करेगा आज संबल के शाही जामा मस्जिद के पास एक कुएं में खुदाई की गई और उसमें तीन हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियां निकली है ।
इसका क्या मतलब है इस सारे मुद्दे का जवाब हमारे इतिहास में छुपा हुआ है और इतिहास कहां है इतिहास यहां है।
आज मैं पहली बार आपको इतिहास के वो पन्ने दिखाऊंगा जिससे आपको सच्चाई पता चलेगी वर्ष 1528 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद
का निर्माण हुआ था जो कि बाबर ने बनवाई थी, और उससे अगले ही साल, 1529 में, संबल में शाही जामा मस्जिद का निर्माण हुआ था। एक मंदिर को तोड़कर उसे भी बाबर ने ही बनवाया था।
बाबर की पूरी कहानी बाबर नामा में है, और बाबर नामा के यह दो संस्करण हैं जो आज मैं आपके लिए लेकर आया हूं। देखिए, यह बाबर नामा है: एक और दो। बाबर नामा 1531 में लिखा गया था, यानी जब संबल में शाही जामा मस्जिद बनी, उसके लगभग दो साल के बाद यह बाबर नामा लिखा गया था। यह बाबर की कहानी है, और इस बाबर नामा में साफ तौर पर यह लिखा हुआ है कि बाबर ने संबल में एक हिंदू मंदिर को तोड़कर
उस पर एक मस्जिद बनाने का आदेश दिया था इसमें य साफसाफ लिखा है और कोई सबूत और सबूत भी है देखिए आज मैं अपने साथ आईने अकबरी लेकर आया हूं अकबर का एक दरबारी था अबुल फजल उसने आज से 425 साल पहले आईने अकबरी में लिखा है कि संबल में एक मंदिर होता था ।
जिसका नाम था हरि मंडल मतलब द टेंपल ऑफ विष्णु जो कि ब्राह्मणों का था और उसके बाद इस मंदिर को तोड़कर इस पर एक मस्जिद बना दी गई इसमें लिखा है एक और सबूत आपको बताता हूं यह है एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल की एक रिपोर्ट जो बाबर के आदेश के बाद तोड़कर इसके ऊपर एक मस्जिद बना दी गई थी।
आज यह पूरा इतिहास सबूतों के साथ हम आपके सामने रखेंगे और आपको यह भी बताएंगे कि जय श्री राम के नारे से लोगों को इतनी आपत्ति क्यों होती है और यह जो जय श्री राम का नारा है इसमें यह उग्रता कहां से आई इसने इतना बड़ा राजनीतिक रूप कैसे ले लिया क्योंकि नारे तो और भी हैं।
जय सियाराम का नारा भी है लेकिन उसे लेकर इतनी आपत्ति नहीं है जितना जय श्री राम के नारे को लेकर आपत्ति है ।
आज इसका इतिहास भी हम आपको बताएंगे तो मिलते हैं आज रात 9 बजे ब्लैक एंड वाइट में आज तक पर जैसे मैं सो रहा हूं तो पिताजी को जगाना है ।
मुझे तो वो डायरेक्ट उठाने के बजाय और हिंसा की परंपरा मेरे यहां नहीं थी सौभाग्य से तो वो क्या करते थे कि उस कमरे में आ जाएंगे या बाहर से गुजरेंगे और चौपाई बोलेंगे प्रात काल उठ के रघुनाथा मात पिता गुरु ना वही मा कभी कभी मैं गुस्से में उठ कर के अरे बापा चरण स्पर्श किया और सो गया मैंने कहा अब मत उठाना ।
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